
बेहतर समाज की शुरुआत सुनने से होती है। जनसंवाद शिकायत नहीं, सहभागिता है।
लोकतंत्र वोट डालने के बाद खत्म नहीं होता। वह तब जीवित रहता है जब नागरिक अपनी बात रख सकें और उन्हें सुना जाए।
विद्यार्थी, शिक्षक, युवा और महिलाएं अगर संवाद से बाहर हैं, तो नीति अधूरी रहती है। जनसंवाद इन आवाज़ों को मुख्यधारा में लाता है।
एक ईमानदार संवाद असहमति से नहीं डरता। वह उसे दिशा देता है। यही अंतर है शोर और निर्माण में।
आपकी बात हमारी प्राथमिकता इसलिए है क्योंकि बिना सुनें कोई समाज शिक्षित नहीं कहला सकता। संवाद ही सबसे पहली शिक्षा है।
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